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सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने वाला इनामी आरोपी साधुराम गिरफ्तार

इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर खुली फाइल

सरकारी जमीन निजी बताकर कराई थी रजिस्ट्री और निर्माण

धार। माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के सख्त रुख के बाद आखिरकार धार जिले की कुक्षी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ग्राम निम्बोल में करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय चरनोई (गौचर) भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी बताकर बेचने और उस पर अवैध निर्माण कराने के मामले में पुलिस ने 3,000 रुपए के इनामी फरार आरोपी साधुराम फुलमाली को गिरफ्तार कर लिया है।

यह पूरी कार्रवाई दिनांक 23 फरवरी 2026 को आवेदक मोतिलाल पाटीदार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में दिए गए आवेदन की जांच के बाद सामने आई। जांच में यह साफ हुआ कि ग्राम निम्बोल स्थित सर्वे क्रमांक 171/1/1/1/1 की 4.25 हेक्टेयर शासकीय चरनोई भूमि पर तत्कालीन सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर फर्जी स्वामित्व प्रमाण-पत्र जारी किए थे। इसी फर्जी कागजात के आधार पर विनोद पाटीदार और रंजना पाटीदार के पक्ष में भूमि की रजिस्ट्री करवाई गई और वहां मकान भी बना लिया गया। मामला उजागर होने पर थाना कुक्षी में अपराध क्रमांक 72/2026 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी (धारा 420, 467, 468, 470, 474, 120-बी भादवि) का केस दर्ज किया गया था।

मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों से दबोचा गया आरोपी 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धार द्वारा आरोपी पर 3,000 रुपए का इनाम घोषित किया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कुक्षी थाना प्रभारी निरीक्षक दीपक सिंह चौहान और निसरपुर चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रवि वास्के के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर फरार चल रहे 62 वर्षीय आरोपी साधुराम (पिता बालाराम फुलमाली, निवासी ग्राम कटनेरा, हाल मुकाम सुसारी) को घेराबंदी कर धर दबोचा। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।

इस कार्रवाई में सहायक उपनिरीक्षक भुवान चौहान, आरक्षक सुभाष चौहान (968), गौरव (90), किशन (679), थानसिंह (265) और रवि अलावे (55) की विशेष और सराहनीय भूमिका रही।

ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय और चरनोई भूमि पर भू-माफियाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से होने वाले अवैध कब्जों के खिलाफ कोर्ट का यह आदेश एक नजीर बनेगा। पुलिस द्वारा की जा रही इस वैधानिक कार्रवाई और सख्त विवेचना से आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े में शामिल तत्कालीन सरपंच, सचिव और अन्य खरीदारों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड की शुचिता के लिहाज से इस कार्रवाई के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।

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