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कृषि महोत्सव से बदलेगी ग्रामीण इकोनॉमी : कलेक्टर की दो टूक- 17 जुलाई तक पूरे हों टारगेट

धार। प्रदेश में कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक के बाद अब मैदानी स्तर पर फैसलों को अमलीजामा पहनाने की तैयारी है। इसी कड़ी में कलेक्टर राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में कृषि एवं उससे जुड़े विभागों की एक हाई-लेवल संयुक्त बैठक संपन्न हुई। 

बैठक में कृषि, आत्मा, कृषि उपज मंडी, उद्यानिकी, पशुपालन, दुग्ध संघ, मत्स्य पालन, कृषि अभियांत्रिकी और सहकारिता विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।

समय पर पूरे हों लक्ष्य, PMFME और AIF पर फोकस

बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर मीना ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में निर्देश दिए कि शासन द्वारा तय किए गए कृषि और विकास कार्यों के लक्ष्यों को तय समय-सीमा के भीतर ही पूरा किया जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

“प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और कृषि अधोसंरचना निधि (AIF) सरकार की प्राथमिकता में हैं। अधिकारी इन योजनाओं के तहत ज्यादा से ज्यादा केस (प्रकरण) तैयार करें ताकि अंतिम छोर पर बैठे लाभार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सके।” – राजीव रंजन मीना, कलेक्टर

गिरदावरी में नहीं चलेगी लापरवाही, उद्यानिकी फसलों का होगा सटीक सर्वे

बैठक में उद्यानिकी फसलों के सही डेटा संकलन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि गिरदावरी में फसलों का डेटा बिल्कुल सटीक और तथ्यात्मक होना चाहिए। इसके लिए विभागीय अमले के माध्यम से ग्रामवार (गांव-गांव जाकर) सर्वे सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी किसान का वास्तविक रिकॉर्ड छूटने न पाए।

‘बलराम कृषि महोत्सव’ में दिखेगी FPOs की ताकत

आगामी 17 जुलाई को जिले में ‘बलराम कृषि महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। बैठक में इसकी रूपरेखा पर विस्तृत मंथन हुआ। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि:

  • सभी संबंधित विभाग महोत्सव में अपनी-अपनी कल्याणकारी योजनाओं की जीवंत (लाइव) प्रदर्शनी लगाएं।
  • किसान उत्पादक संगठनों द्वारा किए जा रहे बेहतरीन कार्यों और उनके प्रोडक्ट्स को प्रमुखता से डिस्प्ले किया जाए।
  • सभी सरकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों की इस महोत्सव में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें मौके पर ही लाभान्वित किया जा सके।

ग्रामीण इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए बनेंगी नई दुग्ध समितियां

ग्रामीण अर्थव्यवस्था (रूरल इकोनॉमी) को मजबूत करने और जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। कलेक्टर ने सहकारिता विभाग और दुग्ध संघ को निर्देशित किया है कि जिले के ग्रामीण इलाकों में नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाए, जिससे पशुपालकों को उनके दूध का सही दाम मिल सके।

बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों को सौंपे गए कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। बैठक में जिले के सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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