जिले को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार होगी समयबद्ध कार्ययोजना
धार। मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आधुनिक तकनीकों के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। ‘मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति 2026’ के तहत जिले में इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।
कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में ‘मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति 2026’ के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक चौधरी सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
नीति के प्रमुख उद्देश्य और लक्षित गतिविधियाँ
बैठक का मुख्य उद्देश्य जिला स्तरीय समिति के माध्यम से नीति को लागू कर ग्रामीण, आदिवासी और कमजोर वर्ग की आय बढ़ाना तथा रोजगार व उद्यमिता के अवसर सृजित करना था। इसमें जल संसाधनों का वैज्ञानिक व सतत उपयोग, उच्च उत्पादन को बढ़ावा देना, राज्य को मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और निर्यात व पर्यटन को गति देना शामिल है। इस दौरान एक्वाकल्चर, इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग, इको-टूरिज्म और केज कल्चर के उद्यमी मॉडल पर निवेशकों के साथ चर्चा की गई।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन, मिलेगी मदद
इस नीति के लागू होने से मत्स्य पालकों को कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी। इसके अलावा, यह नीति ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आय में बढ़ोतरी तथा निर्यात और मार्केटिंग में सहायता प्रदान करने में मददगार साबित होगी।
त्वरित क्रियान्वयन के लिए बनेगी समयबद्ध कार्ययोजना
बैठक के अंत में समिति ने जिले के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी किए। इस समयबद्ध रणनीति का उद्देश्य योजनाओं को सीधे मैदानी स्तर पर त्वरित रूप से पहुंचाना है, जिससे आने वाले समय में जिले के मत्स्य पालकों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सके।
