भोजशाला के पास जुमे की नमाज़ के लिए वैकल्पिक जगह पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट में अब शुक्रवार को होगी सुनवाई
धार। बुधवार 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे भोजशाला परिसर के पास जुमे की नमाज़ के लिए वैकल्पिक खुली जगह उपलब्ध कराने के अदालत के पिछले आदेश का पूरी तरह से और सही भावना से पालन करें। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा दी गई नमाज़ की वैकल्पिक जगह भोजशाला विवादित स्थल से लगभग दो किलोमीटर दूर है, जिससे एक शुक्रवार की नमाज़ पहले ही छूट चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि तय की गई दूरी दो किलोमीटर नहीं बल्कि करीब 900 मीटर है, और प्रशासन नमाज़ के लिए एक और उपयुक्त पास की जगह तलाश रहा है। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि अदालत के आदेश का पालन उसकी मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल के यह कहने पर कि वे इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे, मुख्य न्यायाधीश ने मामले को शुक्रवार 24 जुलाई को अगली समीक्षा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर घोषित करने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, स्थानीय शांति और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अदालत ने प्रशासन को आदेश दिया था कि वह परिसर के बिल्कुल पास में ही मुसलमानों को शुक्रवार की जुमे की नमाज़ अदा करने के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराए। अब देखना यह होगा कि 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में प्रशासन नमाज़ के लिए भोजशाला के पास कौन-सा नया स्थान तय करता है।
