ब्रिटिश संग्रहालय में मां वाग्देवी प्रतिमा का लीगल वेरिफिकेशन पूरा
धार। मां सरस्वती मंदिर भोजशाला की मुक्ति और उसके गौरव की पुनर्स्थापना के लिए जारी कानूनी व सांस्कृतिक संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। 5 अगस्त (बुधवार) को देश के इतिहास में कई ऐतिहासिक घटनाओं की यादों के बीच भोजशाला मामले को लेकर भी एक महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली। एक तरफ जहाँ सर्वोच्च न्यायालय में इस प्रकरण की सुनवाई की नई तारीख तय हुई है, वहीं दूसरी तरफ लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में स्थापित मां वाग्देवी की ऐतिहासिक प्रतिमा को भारत वापस लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है।
बुधवार 5 अगस्त को उच्चतम न्यायालय में इस प्रकरण की सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारणवश यह टल गई। अब इस मामले की सुनवाई आज, गुरुवार 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ के समक्ष 177वें नंबर पर होगी। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से मुख्य प्रतिवादी के रूप में सनातनी योद्धा विष्णु शंकर जैन, हाईकोर्ट अधिवक्ता विनय जोशी और रोहित शुक्ला के साथ हिंदू पक्ष की पैरवी करेंगे। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने एक वीडियो जारी कर यह जानकारी दी।
आशीष गोयल ने बताया कि भारत सरकार ने लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति का लीगल वेरिफिकेशन (कानूनी सत्यापन) पूरा कर लिया है, जिससे अब इस प्रतिमा के अपने मूल धाम भोजशाला पहुँचने की संभावना बढ़ गई है। इस प्रयास की नींव वर्ष 1961 में पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने रखी थी, जिन्होंने लंदन जाकर इसका पहला भौतिक सत्यापन किया था और यह सिद्ध किया था कि यह वही प्रतिमा है जिसे राजा भोज ने सन 1034 में भोजशाला निर्माण के बाद वसंतोत्सव पर स्थापित किया था।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा मई 2022 में (हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री, आशीष जनक और विनय जोशी के माध्यम से) दायर याचिका पर 15 मई 2026 को इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह स्मारक मां सरस्वती मंदिर भोजशाला है, जहाँ नमाज़ हमेशा के लिए बंद होगी, हिंदुओं को प्रतिदिन पूजा का अधिकार मिलेगा और यह संस्कृत अध्ययन का केंद्र बनेगा। साथ ही अदालत ने सरकार को मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से लाकर धार भोजशाला में स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इस दिशा में कार्य करने के लिए संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया है।
धार स्थित भोजशाला सदियों से भारत की ज्ञान परंपरा और स्थापत्य कला का प्रमुख केंद्र रही है। 1961 में डॉ. वाकणकर के प्रयासों से शुरू हुई वाग्देवी की प्रतिमा वापसी की मुहिम को मई 2022 की कानूनी याचिका से नई गति मिली। 15 मई 2026 को हाईकोर्ट इंदौर के फैसले ने इस कानूनी लड़ाई को तार्किक परिणति तक पहुँचाया, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और समीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
यदि 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से हिंदू पक्ष के हक में फैसला बरकरार रहता है, तो यह न केवल धार की ऐतिहासिक विरासत की पुनर्स्थापना करेगा, बल्कि विदेशों में रखी भारत की प्राचीन और सांस्कृतिक धरोहरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाने का एक मजबूत आधार भी बनेगा।

