त्रिवेणी संगम के जल से धारेश्वर महादेव का हुआ अभिषेक
धार। सावन के पावन महीने में जब आस्था और नारी शक्ति का संगम एक साथ सड़कों पर उतरा, तो धार शहर पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग गया। पारंपरिक वेशभूषा में कावड़ उठाए सैकड़ों महिलाओं के कदमों और उनके जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो उठा। मौका था ‘मातृशक्ति संगठन’ के तत्वावधान में आयोजित विशाल कावड़ यात्रा का, जिसने धार्मिक निष्ठा के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता का एक नया उदाहरण पेश किया।
सावन के अवसर पर आयोजित इस भव्य कावड़ यात्रा का शुभारंभ स्थानीय लालबाग से हुआ, जिसके संयोजक अनिल जैन ‘बाबा’ और मातृशक्ति संगठन की अध्यक्ष पप्पी मकवाना थीं। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई ऐतिहासिक धारेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करना था। यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रयागराज त्रिवेणी संगम से लाए गए पवित्र जल से भगवान धारेश्वर महादेव का विधि-विधान पूर्वक जलाभिषेक कराया गया तथा प्रसादी के रूप में खिचड़ी का वितरण किया गया।
पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, उमड़ा जनसैलाब
कावड़ यात्रा के मीडिया समन्वयक ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कावड़ यात्रियों का अभूतपूर्व स्वागत किया गया। जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई तथा कावड़धारियों के लिए पेयजल एवं अल्पाहार की व्यवस्थाएं की गईं। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोषों के बीच महिलाओं की भारी उपस्थिति इस पूरी यात्रा के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।

कार्यक्रम में प्रकाश धाकड़ (पीथमपुर), ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, योगेश अग्रवाल, मोहन जोशी, दीपक बीड़कर, सावित्री दीदी, सीमा राजपूत, मुस्कान थोड़े, गोपी बोरदिया, सीमा सोनी, लक्ष्मी नरोले सहित कई गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। यात्रा के सफल आयोजन पर संयोजक अनिल जैन बाबा और अध्यक्ष पप्पी मकवाना ने सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
सावन मास में कावड़ यात्रा और पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने की सनातन परंपरा सदियों पुरानी है। धार में आयोजित इस यात्रा ने न केवल स्थानीय स्तर पर सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि इसमें महिलाओं की अग्रणी भूमिका ने यह संदेश भी दिया है कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में मातृशक्ति की भागीदारी समाज को जोड़ने और भावी पीढ़ियों में सांस्कृतिक चेतना जगाने में सबसे सशक्त माध्यम है।
