Headlines

धार भोजशाला विवाद : सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, हिंदू समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

सर्वे नंबर 596 के बदले 612 पर नमाज की तैयारी

भोजशाला मामले में हिंदू समाज ने प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

धार। ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति बन गई है, जहां हिंदू समाज ने प्रशासन पर तय स्थान के बजाय दूसरी जगह नमाज की व्यवस्था करने का गंभीर आरोप लगाया है।

मंगलवार, 25 अगस्त को धार में ‘सकल हिंदू समाज’ ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी राजीव रंजन मीना को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस.एल.पी. क्रमांक 9310/2026 में 30 जुलाई 2026 को दिए गए अंतरिम आदेश में सर्वे नंबर 596 पर नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही गई थी। समाज का दावा है कि प्रशासन आदेश के विपरीत जाकर मुस्लिम पक्ष के दबाव में सर्वे नंबर 596 के बजाय सर्वे नंबर 612 पर शुक्रवार की नमाज कराने की तैयारी कर रहा है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में गूगल मैप पर पीले रंग की लाइन बनाकर वास्तविक स्थिति के विपरीत तथ्य रखे थे, जिसके आधार पर शुक्रवार दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच नमाज की अंतरिम अनुमति मिली। हिंदू समाज का कहना है कि वे न तो कोर्ट के आदेश के खिलाफ हैं और न ही किसी की इबादत के, लेकिन बिना हिंदू पक्ष को विश्वास में लिए और बिना सहमति के सर्वे नंबर बदलकर की जा रही व्यवस्था से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

कलेक्टर राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि पूरा मामला न्यायालय के विचाराधीन (सब-ज्यूडिस) है और प्रशासन अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहा है। उन्होंने बताया कि 300 मीटर के दायरे और अन्य तकनीकी बिंदुओं से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के तहत किया जा रहा है तथा सभी पक्षों के लिए विधिक विकल्प खुले हैं।

धार स्थित भोजशाला लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। ज्ञापन में यह भी चिंता जताई गई है कि पिछले 50-60 वर्षों से शहर में कायम शांति व्यवस्था पर इस नए प्रशासनिक निर्णय से कोई प्रतिकूल असर न पड़े। हिंदू समाज ने मांग की है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उनकी सहमति ली जाए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उसके मूल स्वरूप में ही पालन कराया जाए, जिसके लिए समाज प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *