ऑटोमैटिक सेंसर लगाने और पानी समितियों के पुनर्गठन के निर्देश
धार। ग्रामीण अंचलों में अब घर-घर पानी पहुंचाने की व्यवस्था केवल पाइपलाइन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक के जरिए सीधे मोबाइल स्क्रीन से नियंत्रित होगी। धार जिले में पेयजल वितरण को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने अब पुरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मंगलवार, 15 सितंबर को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल निगम द्वारा जिले में संचालित पेयजल योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में पीएचई के कार्यपालन यंत्री एससी जनोलिया व एनएस भूरिया, जल निगम के महाप्रबंधक गौरव सिंघई, उप महाप्रबंधक कुलदीप कलम, नीरज नीलोसे तथा राकेश बेहरा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी ग्राम पंचायतों में पानी समितियों का पुनर्गठन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक कर नियमित जल प्रभार की वसूली को बढ़ावा दिया जाए, ताकि योजनाओं का संचालन बिना किसी वित्तीय बाधा के जारी रहे।
तकनीकी सुधारों पर जोर देते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि नल-जल योजनाओं में ऑटोमैटिक सेंसर लगाए जाएं, जिससे मोटर पंपों का संचालन और निगरानी मोबाइल ऐप के जरिए हो सके। इसके अलावा नई नल-जल योजना संचालन-संधारण नीति के तहत पंचायतों को प्रशिक्षित करने, जल संरक्षण कार्यों को गति देने, पेयजल स्रोतों के रखरखाव, नियमित क्लोरीनीकरण और एफटीके किट के जरिए पानी की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन के इस कदम से आने वाले समय में ग्राम पंचायतों की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सेंसर और मोबाइल ऐप आधारित प्रणाली लागू होने से जहां पानी की बर्बादी और मोटर जलने जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी, वहीं नियमित गुणवत्ता परीक्षण और सक्रिय जल समितियों के जरिए ग्रामीणों को हर मौसम में शुद्ध व सुरक्षित पेयजल मिल सकेगा।
