दाभड़ पंचायत में राशि आहरण समेत कई मामलों पर सुनवाई
धार। जनसुनवाई केवल समस्याओं को दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने और त्वरित राहत पहुंचाने का सशक्त मंच है। इसी प्रतिबद्धता के साथ धार जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में दूर-दराज से पहुंचे नागरिकों की बुनियादी मुश्किलों और मांगों पर गंभीरता से सुनवाई की गई।
मंगलवार, 29 सितम्बर को धार जिला मुख्यालय पर आयोजित इस जनसुनवाई में कलेक्टर राजीव रंजन मीना के समक्ष जिले भर से पहुंचे नागरिकों ने कुल 101 आवेदन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अखिलेश कुमार जैन, अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने मौके पर ही आवेदनों की पड़ताल कर मैदानी अमले को वैधानिक समाधान के निर्देश दिए।
अवैध निर्माण कार्यों पर निकाली राशि
जनसुनवाई में प्रशासनिक और पंचायत स्तर की गंभीर शिकायतें भी सामने आईं। उमरबन विकासखण्ड की ग्राम पंचायत दाभड़ के ग्रामीणों ने सब इंजीनियर, सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से अवैध निर्माण कार्यों के नाम पर अनियमित राशि आहरित करने का गंभीर आरोप लगाया।
कई अहम मुद्दों पर आए आवेदन
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, संबल योजना, आवासीय पट्टे, भूमि सीमांकन, भू-अर्जन मुआवजे, शासकीय व निजी भूमि से अतिक्रमण हटाने, बीमारी व मृत्यु पर आर्थिक सहायता, कोटवारों का मानदेय बढ़ाने, सेवानिवृत्ति क्लेम, फर्जी फौती नामांतरण, आंगनवाड़ी में फर्जी नियुक्ति, खनिज लीज निरस्त करने और स्वसहायता समूहों को तीन माह से खाद्यान्न वितरण न होने जैसे कई अहम मुद्दों पर आवेदन प्राप्त हुए।
आपस में तालमेल बैठाकर आवेदकों को मिले न्याय
कलेक्टर मीना ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े मामलों का निराकरण संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में तत्काल राहत संभव है, उनका फौरन समाधान हो और जहां अंतर-विभागीय समन्वय की जरूरत हो, वहां आपस में तालमेल बैठाकर आवेदकों को न्याय दिलाया जाए। सभी आवेदनों का निश्चित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए गए।
प्रशासन की इस सक्रियता और नियमित समीक्षा से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में न केवल पंचायत स्तर पर हो रही वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं पर रोक लगेगी, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी और बिचौलियों के पहुंच सकेगा।
