इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित ड्रग्स, ऑनलाइन सट्टा और भूमाफिया सिंडिकेट मामले में एक बेहद नाटकीय मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच से बचने के लिए ‘बेड रेस्ट’ का संदिग्ध मेडिकल सर्टिफिकेट लगाने वाले कॉलोनाइजर सुमित मंत्री की पोल खुद डॉक्टर ने खोल दी है। वहीं, थाने में डॉक्टर से चल रही तीखी पूछताछ की भनक लगते ही सुमित मंत्री पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर टीमें रवाना कर दी हैं।
नाटकीय मोड़ पर पहुँचा महा-सिंडिकेट मामला
यह पूरा घटनाक्रम इंदौर के राजेंद्र नगर थाने का है, जहाँ पुलिस की टीमें 9 जुलाई को दर्ज एनडीपीएस मामले और 16 जुलाई को दर्ज ऑनलाइन गेमिंग सट्टा मामले की कड़ियों को जोड़ रही हैं। जांच अधिकारी डीसीपी नरेंद्र रावत के नेतृत्व में इस महा-सिंडिकेट में शामिल ड्रग्स तस्कर, सटोरियों और भूमाफियाओं के गठजोड़ की जांच कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पुलिस ने सुमित मंत्री को संदिग्ध मेडिकल सर्टिफिकेट देने वाले डॉक्टर दीपक बंसल को तलब कर पूछताछ की और मामले की परतें खोलीं।
डॉक्टर बंसल ने पुलिस के सामने उगला सच
राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने जब जोडियाक मॉल में क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर दीपक बंसल से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने खुद का बचाव करते हुए सारा सच उगल दिया। डॉक्टर ने बताया कि सुमित मंत्री (जिनका ऑफिस भी जोडियाक मॉल में ही है) 14 जुलाई को रात करीब 8 बजे उनके पास आया था। उसने गले में खराबी और तेज बुखार की बात कही, जिस पर सामान्य तौर पर 5 दिन का आराम लिखा गया था। डॉक्टर ने पुलिस को दिए ऑन-रिकॉर्ड बयानों में स्पष्ट किया कि उन्होंने सुमित को सख्त हिदायत दी थी कि इस पर्चे का उपयोग कोर्ट या पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए न किया जाए, लेकिन सुमित ने इसका गलत इस्तेमाल किया।
थाने में पुलिस को चकमा देकर भागा कॉलोनाइजर
जब अंदर कमरे में डॉक्टर बंसल के बयान दर्ज हो रहे थे, ठीक उसी समय कॉलोनाइजर सुमित मंत्री अपनी फर्मों की डिटेल्स और शुभम वैली कॉलोनी के दस्तावेज लेकर शाम करीब 5:15 बजे राजेंद्र नगर थाने पहुँचा था। वहाँ करीब 10-15 मिनट बैठने के बाद जैसे ही उसे भनक लगी कि डॉक्टर से उसके मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर तीखी पूछताछ चल रही है, वह बिना किसी पुलिस अधिकारी को सूचना दिए और बिना बयान दर्ज कराए वहाँ से रफूचक्कर हो गया।
शुभम वैली के 374 प्लॉटों की जांच तेज
पुलिस की दर्जनभर टीमें अब सुमित मंत्री और उसके पिता कल्याण मंत्री की ‘शुभम वैली कॉलोनी’ के सभी 374 प्लॉटों का डेटा और बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही हैं। दरअसल, एक युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी ने शुभम वैली के प्लॉट को लेकर उसके साथ लाखों रुपये की जालसाजी का एग्रीमेंट किया था। युवती को न तो प्लॉट मिला और न ही पैसे वापस मिले। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि नाना पटवारी ने किस आधार पर एग्रीमेंट किया और क्या सुमित मंत्री भी इस धोखाधड़ी में शामिल है। सुमित मंत्री को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक अलग से नोटिस भी जारी किया जा रहा है।
संजय कौशल का ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क
इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार एनडीपीएस केस का आरोपी संजय कौशल उर्फ रॉनी भाई है, जो ड्रग्स और सट्टा दोनों मामलों में कॉमन है। कोर्ट से उसकी 2 दिन की रिमांड बढ़ने के बाद उसके मोबाइल से संचालित हो रहे विशाल ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। संजय और प्रितेश त्रिपाठी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि आज एक और सटोरिये को राउंडअप कर पुलिस कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है। वहीं संजीव जैन और दिनेश चौहान सहित अन्य फरार सटोरियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
भविष्य की कार्रवाई और फॉरेंसिक जांच
डीसीपी नरेंद्र रावत के मुताबिक, इस महा-सिंडिकेट के हर एक पहलू (ड्रग्स, सट्टा और जमीन) की बारीकी से जांच की जा रही है। ज़ब्त किए गए सभी मोबाइलों को फॉरेंसिक और साइबर विंग के पास भेजा गया है, जहाँ डेटा एक्सट्रैक्शन का काम जारी है। पुलिस के मुताबिक बैंक खातों और डिजिटल डेटा के फॉरेंसिक विश्लेषण के बाद इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और पुख्ता सबूत मिलते ही सुमित मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना तय है।

