पुलिस ने सफाई में कहा-‘लूट के आरोपियों की धरपकड़ में व्यस्त था स्टाफ’
धार। दूरस्थ आदिवासी अंचल की एक पुलिस चौकी, फरियादियों की उम्मीदें और मौके पर एक भी वर्दीधारी नहीं-मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के एक औचक दौरे ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सियासी पारा चढ़ा दिया है। चौकी के खाली कमरों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया, जिसके तुरंत बाद जिला पुलिस प्रशासन को औपचारिक स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ करनी पड़ी।
यह पूरा घटनाक्रम गंधवानी विधानसभा क्षेत्र के थाना अमझेरा अंतर्गत आने वाली केशवी पुलिस चौकी का है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जब अचानक इस दूरस्थ चौकी पर पहुंचे, तो वहां न तो चौकी प्रभारी मिले और न ही कोई अन्य पुलिसकर्मी मौजूद था। इस पर सिंघार ने वीडियो बनाते हुए सीधे जिला प्रशासन और एसपी पर सवाल दागे। उन्होंने कहा, “पुलिस प्रशासन की यह व्यवस्था है। यहाँ कोई चौकी प्रभारी नहीं रहता। ऐसे में दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र के ग्रामीण परेशान होकर आते हैं, तो उनकी समस्याएँ कौन सुनेगा? मैं जिला प्रशासन और एसपी शर्मा जी से कहना चाहूँगा कि ध्यान दें, किस प्रकार से आपका प्रशासन चल रहा है।”
नेता प्रतिपक्ष के आरोपों और वायरल वीडियो के जवाब में पुलिस प्रशासन ने प्रेसनोट जारी कर अपनी वस्तुस्थिति स्पष्ट की है। पुलिस के अनुसार:
- चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक रमेश चन्द्र डामोर और प्रधान आरक्षक (245) नरपत सिंह ओहरिया लूट के एक मामले (अपराध क्रमांक 199/2026, धारा 309(6) बीएनएस) की विवेचना के सिलसिले में दो गिरफ्तार आरोपियों को लेकर जप्ती की कार्रवाई के लिए गए हुए थे।
- यह कार्रवाई चौकी से लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम हाथीपावा और ग्राम बावड़ीखोदड़ा में चल रही थी।
- चौकी पर कुल बल चौकी प्रभारी के अलावा 02 प्रधान आरक्षक का ही है, और बाकी स्टाफ भी अन्य मामलों के अनुसंधान के सिलसिले में फील्ड में था। इसी कारण उस समय चौकी परिसर में कोई जवान उपस्थित नहीं था।
यह मामला केवल एक औचक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूरस्थ आदिवासी इलाकों की चौकियों में सीमित पुलिस बल और वहां की प्राथमिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच के संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। विपक्ष द्वारा सीधे जिले के शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को घेरे जाने के बाद, आने वाले दिनों में दूरदराज की चौकियों में न्यूनतम स्टाफ की तैनाती और व्यवस्थागत सुधारों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा तेज होने की संभावना है।
