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खलघाट नर्मदा पुल पर देवदूत बनी पुलिस : बच्चे समेत छलांग लगाने पहुंचे पिता को सूझबूझ से बचाया

एक कार चालक की सूचना और पुलिस की तत्परता से खलघाट ब्रिज पर बची दो जिंदगियां

धार। नर्मदा नदी के उफनते पानी से कई फीट ऊपर खलघाट ब्रिज की रेलिंग पर एक पिता अपने मासूम बच्चे को थामे मौत के मुहाने पर खड़ा था। इससे पहले कि घरेलू कलह से उपजी हताशा एक गहरे सदमे में बदलती, खाकी की त्वरित सूझबूझ ने मौके पर पहुंचकर दोनों की जिंदगी बचा ली।

यह घटना 10 सितंबर गुरुवार को खलघाट चौराहे के पास नर्मदा नदी सेतु पर हुई। चौराहे पर यातायात व्यवस्था संभाल रहे हाईवे चौकी के प्रधान आरक्षक अजय सोलंकी (क्रमांक 548) को एक कार चालक ने सूचना दी कि एक व्यक्ति अपने बच्चे के साथ पुल पर खड़ा होकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान आरक्षक बिना एक पल गंवाए एक स्थानीय ठेला संचालक को साथ लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बेहद संयम से बातचीत कर व्यक्ति को विश्वास में लिया और दोनों को सुरक्षित ब्रिज से उतारकर पुलिस सहायता केंद्र लेकर आए।

पूछताछ में व्यक्ति ने अपनी पहचान विनोद गवली (निवासी कुक्षी) के रूप में दी। उसने बताया कि पत्नी से पारिवारिक विवाद के चलते वह अत्यधिक मानसिक तनाव और आक्रोश में था, जिसके कारण वह अपने बच्चे को साथ लेकर नर्मदा में कूदने आया था। सहायता केंद्र पर प्रधान आरक्षक ने उसे जीवन के मूल्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर समझाइश दी। इसके बाद डायल-112 को सूचित कर उपनिरीक्षक  मदनलाल परमार और पायलट चेतन अलावा के माध्यम से दोनों को आगामी प्रक्रिया हेतु थाना धामनोद रवाना किया गया।

घरेलू तनाव के चलते उठाए जाने वाले ऐसे आत्मघाती कदमों के बीच पुलिस कर्मियों की इस मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता ने न केवल एक परिवार को बिखरने से बचा लिया, बल्कि संकट के समय पुलिस के प्रति आमजन के भरोसे को भी मजबूती दी है।

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