वन और राजस्व विभाग की संयुक्त समीक्षा, बैठक में कलेक्टर हुए सख़्त
धार। जिले में लंबे समय से अटके वन एवं राजस्व मामलों को सुलझाने के लिए प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। समीक्षा बैठक के दौरान वन अधिकार पत्रों से जुड़ी फाइलों का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर कलेक्टर ने कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित शाखा प्रभारी पर सीधे एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संरक्षित वनों को आरक्षित घोषित करने और लैंड बैंक तैयार करने जैसे कई अहम मुद्दों पर विभागीय गतिरोध को दूर करने की ठोस रूपरेखा तय की गई।
सोमवार, 28 सितम्बर को धार कलेक्टर सभाकक्ष में कलेक्टर राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में वनमण्डलाधिकारी टी.आर. विजयानंथम, जिला पंचायत सीईओ अखिलेश कुमार जैन, अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वन अधिकार अधिनियम, वन भूमि व्यवस्थापन, क्षतिपूर्ति वनीकरण और लंबित प्रकरणों का आपसी समन्वय से त्वरित समाधान करना था।
जल्द हो घासबीड़ों व वनक्षेत्रों का सर्वे कार्य
बैठक में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 5 से 19 के तहत लंबित वन व्यवस्थापन प्रकरणों की समीक्षा कर संरक्षित वन को आरक्षित वन घोषित करने के लिए संबंधित एसडीएम (राजस्व) को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त पीथमपुर वनक्षेत्र को कार्ययोजना में शामिल करने हेतु संयुक्त स्थल निरीक्षण और अकोलिया घासबीड़ के सर्वे के बाद जिले के बाकी घासबीड़ों व वनक्षेत्रों का सर्वे कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया।
पोर्टल पर दर्ज हो खसरा रकबा
कुक्षी माइक्रो इरिगेशन परियोजना के तहत जारी संशोधित आदेशों के बावजूद भू-अभिलेख पोर्टल पर खसरों का रकबा दर्ज न होने की समस्या पर भी तत्काल सुधार के आदेश जारी किए गए।
लैंड बैंक स्थापित पर हुई चर्चा
खनिज विभाग द्वारा उत्खनन के लिए जारी एनओसी और भविष्य के विकास कार्यों के लिए जिले में लैंड बैंक स्थापित करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार पत्रों (सीएफआरआर) के तहत राजस्व वन भूमि तथा छोटे-बड़े झाड़ के जंगल से जुड़ी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन के इस सख्त रुख और त्वरित समीक्षा का सीधा असर जिले के कई बड़े पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स पर दिखेगा। खरमोर अभयारण्य (सरदारपुर) और डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान (बाग) में वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकारों के विनिश्चयन की प्रक्रिया पूरी होने से इनकी अंतिम अधिसूचना का रास्ता साफ होगा। वहीं, वनग्रामों के राजस्व ग्राम में बदलने से स्थानीय ग्रामीणों को मूलभूत शासकीय योजनाओं और राजस्व अधिकारों का सीधा लाभ मिलना आसान हो जाएगा।
