पीथमपुर से धार तक फैला मिला इंडस्ट्रियल नेटवर्क, बैंक खाते और लॉकर खुलना बाकी, और बढ़ सकता है अकूत संपत्ति का आंकड़ा
इंदौर। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के भ्रष्ट अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल की काली कमाई का घड़ा आखिरकार फूट ही गया। 33 साल की सरकारी नौकरी में महज 2 करोड़ रुपए की वैध आय अर्जित करने वाले इस अफसर ने पर्दे के पीछे 14 करोड़ 54 लाख रुपए से भी अधिक का साम्राज्य खड़ा कर लिया, जो उसकी जायज आमदनी से पूरे 627 प्रतिशत अधिक है। इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना सहित 9 ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद लोकायुक्त ने संपत्ति का प्रारंभिक आकलन जारी कर दिया है।
अधीक्षण यंत्री ने बिजली कंपनी के रसूखदार पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए सरकारी तनख्वाह से हटकर अपना खुद का इंडस्ट्रियल नेटवर्क तैयार कर लिया था। जांच में पीथमपुर के सेक्टर-3 में 1.06 करोड़ रुपए की ‘शुभम इलेक्ट्रिकल’ ट्रांसफॉर्मर इकाई और 71 लाख की एक अन्य औद्योगिक यूनिट का भंडाफोड़ हुआ है। इसके अलावा धार के उज्जैनी में 2.06 करोड़ की ‘एसएस इलेक्ट्रिकल्स’ केबल फैक्ट्री और 10 लाख की लागत से बन रही ‘कृष्णा पावर’ नाम की निर्माणाधीन यूनिट भी इसी भ्रष्ट अफसर की काली कमाई की देन निकली है। काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए सेमिल ने रियल एस्टेट में भी बेधड़क पैसा खपाया। इंदौर की सिलिकॉन सिटी में 1.69 करोड़ रुपए का तीन मंजिला आलीशान बंगला और 2 करोड़ रुपए की लागत से बन रही एक अन्य तीन मंजिला इमारत लोकायुक्त के हाथ लगी है। इसके साथ ही अंजली नगर में 1.49 करोड़ का फैक्ट्री-ऑफिस परिसर, बेटे के नाम पर 20 लाख का प्लॉट, मुरैना में 50 लाख का मकान और 31.50 लाख रुपए की चमचमाती लग्जरी कार भी बरामद हुई है। जांच टीम को पीथमपुर स्थित फैक्ट्री परिसर में मशीनरी, शेड और कंस्ट्रक्शन के नाम पर करीब 4.17 करोड़ रुपए के भारी-भरकम निवेश के सबूत मिले हैं। शुरुआती पड़ताल में ही जब 14.54 करोड़ का खजाना मिल चुका है, तो अब लोकायुक्त की नजरें सेमिल और उनके परिवार के नाम पर दर्ज बैंक खातों और लॉकरों पर टिकी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों और कागजातों का सत्यापन पूरा होने के बाद इस अकूत संपत्ति का आंकड़ा कई करोड़ रुपए और ऊपर जा सकता है।
अधिकारियों में मचा हड़कंप
मंगलवार सुबह 5.30 बजे शुरू हुए इस बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। सरकारी मुलाजिम बनकर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले इस अधीक्षण यंत्री के खिलाफ खाकी का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। इस बड़े खुलासे के बाद बिजली महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और सेमिल के इस काले कारोबार में मदद करने वाले कई अन्य अधिकारी भी जल्द ही जांच के दायरे में आ सकते हैं।
