फर्जी बैंक खाते सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों की गाढ़ी कमाई ऐंठने वाले एक बड़े साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच ने बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड का जाल बिछाकर देशभर में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन करने वाले इस हाई-प्रोफाइल रैकेट के एक और मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
यह मामला इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र का है, जहां एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) इंजीनियर के साथ 1.60 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने फर्जी बैंक खातों के जरिए चल रहे इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। इसी कड़ी में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लसूड़िया थाना क्षेत्र की रॉयल अमर ग्रीन कॉलोनी (निरंजनपुर) निवासी आरोपी समर्थ बरदेला (पिता महेंद्र बरदेला) को दबोच लिया है। समर्थ इस मामले में गिरफ्तार होने वाला छठा आरोपी है।
जांच में सामने आया कि समर्थ बरदेला और उसके साथी भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद उन खातों की पूरी बैंकिंग किट (चेकबुक, पासबुक, एटीएम) और सिम कार्ड साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तक पहुंचाते थे। आरोपी टेलीग्राम के जरिए मास्टरमाइंड से संपर्क में रहता था और ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाने का काम नियंत्रित करता था।
इससे पहले क्राइम ब्रांच इस मामले में जय सूर्यवंशी, जतिन हरियाले, आकाश विश्वकर्मा, प्रवीण पाल और आशीष पूरी को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अब तक आरोपियों के पास से 16 मोबाइल, सिम कार्ड, पासबुक और एक स्कार्पियो गाड़ी ज़ब्त कर चुकी है। खातों की जांच में अब तक करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला है।
क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, आरोपी समर्थ को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में उसके तार दिल्ली और लखनऊ से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पूछताछ के आधार पर इंदौर के कुछ अन्य संदिग्ध युवकों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश तेज करने के साथ-साथ गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति का ब्यौरा जुटाने के लिए नगर निगम से पत्राचार कर रही है।
