धार में मिल्क क्रीम घी का नमूना असुरक्षित पाया गया
घी के भोपाल में 6, इंदौर में 4, उज्जैन-डिंडोरी में 2-2 सैंपल असुरक्षित पाए गए
भोपाल। थाली में परोसा जाने वाला शुद्ध देसी घी अगर सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो सतर्क होना लाजिमी है। मध्य प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ा शिकंजा कसते हुए अमानक और असुरक्षित घी व दुग्ध उत्पादों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। प्रयोगशाला जांच में कई नामी ब्रांड्स के घी में पाम ऑयल सहित अन्य हानिकारक पदार्थों की मिलावट की पुष्टि हुई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश भर में 20 जुलाई से मिलावटी दूध, घी और अन्य दुग्ध उत्पादों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा सघन अभियान चलाया जा रहा है। इस राज्यव्यापी कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पूरे प्रदेश से 2500 से अधिक नमूने एकत्र कर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे। अब तक जारी 889 नमूनों की जांच रिपोर्ट में 112 नमूने अमानक (सब-स्टैंडर्ड) और घी के 12 प्रमुख ब्रांड असुरक्षित पाए गए हैं।
जांच में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, धार, दमोह और डिंडोरी जैसे जिलों से लिए गए नमूनों में व्यापक अनियमितता पाई गई है। घी के 12 ब्रांड जांच में असुरक्षित मिले। इनमें पॉम आयल सहित अन्य मिलावट पाई गई भोपाल में शगुन, द्वारकेश, भूमि, दानेदार, भूमि प्रीमियम और भूमि काऊ प्योर घी के सैंपल असुरक्षित मिले हैं। इंदौर में श्री सुधा प्रीमियम, गुमार प्योर, श्री मूल शुद्ध घी और श्री मूल गाय का घी अमानक या असुरक्षित पाए गए उत्पादों में शामिल हैं। इसी तरह उज्जैन, डिंडौरी में 2-2, दमोह-धार में एक-एक सैंपल अमानक मिला। धार में मिल्क क्रीम घी अमानक पाया गया।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प के अनुसार, असुरक्षित व अमानक उत्पाद बेचने और बनाने वाले सभी संबंधित निर्माताओं व विक्रेताओं के विरुद्ध ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम’ के तहत सक्षम न्यायालयों में मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लगातार जारी इस निरीक्षण, जब्ती और अदालती कार्रवाई से मिलावट के अवैध कारोबार पर कड़ा अंकुश लगने की उम्मीद है। प्रशासन की इस सख्ती से भविष्य में बाजार में बिकने वाले दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचेगी।
