नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस परिसर को ‘सरस्वती मंदिर’ घोषित करने वाले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने संतुलन बनाते हुए मुस्लिम पक्ष को एक बड़ी अंतरिम राहत जरूर दी है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के मामले में जारी किया गया है। अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया, जिसमें परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित कर उसका प्रबंधन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपने की बात कही गई थी। अपने अंतरिम आदेश के तहत कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि परिसर में प्रबंधन की वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें परिसर के पास एक विकल्प दिया जाएगा।
कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु और शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में तीन बेहद महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की हैं:
- हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित करने और एएसआई (ASI) को इसका प्रबंधन सौंपने के फैसले पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है।
- यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश : परिसर की मौजूदा स्थिति या ढांचे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को बिना अदालत की अनुमति के कोई भी बदलाव (Alteration) करने की सख्त मनाही है।
- नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था : मुस्लिम समुदाय के लिए हर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज हेतु परिसर के निकट एक उपयुक्त खुली जगह उपलब्ध कराई जाएगी। अदालत ने साफ किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और अदालत के अंतिम फैसले के अधीन होगी।
ऐतिहासिक रूप से धार का भोजशाला परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच आस्था और दावों का केंद्र रहा है, जहाँ हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद के रूप में देखता है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश कानूनी प्रक्रिया के अंतिम नतीजे आने तक दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है। चूंकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संरचना में कोई भी बदलाव बिना अनुमति के नहीं होगा और नमाज की व्यवस्था भी अस्थायी है, इसलिए अब सभी की नजरें इस मामले में आने वाले सुप्रीम कोर्ट के अंतिम और पूर्ण फैसले पर टिकी हुई हैं, जो इस विवाद की भविष्य की दिशा तय करेगा।
