सपनों का सौदागर या ब्लैकमेलर
इंदौर। इंदौर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के सपनों का सौदा करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। रोजगार दिलाने के नाम पर युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ब्लैकमेल करने वाले एक शातिर कंसल्टेंसी संचालक को पुलिस ने दबोच लिया है। आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों की संख्या देखकर खुद पुलिस भी हैरान है।
18 जुलाई को इंदौर की विजयनगर थाना पुलिस ने ऑर्बिट मॉल स्थित ‘अल्फ़ा कंसल्टेंसी’ के दफ्तर पर कार्रवाई करते हुए इसके संचालक मयंक सराफ को हिरासत में लिया है। मूल रूप से देवास का रहने वाला यह ग्रेजुएट आरोपी सोशल मीडिया के जरिए इंदौर, कटनी, ग्वालियर-चंबल और मालवा क्षेत्र के भोले-भाले छात्रों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस ने इसके पास से 10वीं और 12वीं कक्षा की कुल 313 ओरिजिनल मार्कशीट बरामद की हैं।

झांसा, जब्ती और जान से मारने की धमकी
जांच में सामने आया है कि मयंक सराफ नौकरी दिलाने के बहाने छात्रों से उनके असली शैक्षणिक दस्तावेज जमा करवा लेता था। जब वह नौकरी नहीं दिला पाता था और छात्र अपनी मार्कशीट वापस मांगते थे, तो वह प्रति मार्कशीट 5,000 से 10,000 रुपये की अवैध वसूली करता था। शिकायत के मुताबिक, जो छात्र पैसे देने से इनकार करते थे, उन्हें आरोपी द्वारा जान से मारने की धमकी भी दी जाती थी।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस का अगला कदम
डीसीपी अमर सिंह राठौर ने पत्रकारवार्ता में बताया कि आरोपी मयंक सराफ का पुराना कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में ख्यानत की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे रिमांड पर लिया है। पुलिस अब जब्त की गई 313 मार्कशीट के आधार पर पीड़ित छात्रों से संपर्क कर उनकी पहचान करने में जुटी है।
नेटवर्क की जांच और भविष्य का असर
इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि इस बड़े फर्जीवाड़े में कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं, जिससे शहर में चल रहे अन्य फर्जी जॉब सेंटरों पर भी शिकंजा कसेगा।
