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MP में e-Zero FIR का दायरा घटाकर 25 हजार किया, ‘गोल्डन ऑवर’ में फ्रीज होगी ठगी की राशि

साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए राहत 

भोपाल। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हुए नागरिकों की मेहनत की कमाई को अपराधियों के हाथों में जाने से बचाने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने एक बड़ा और त्वरित कदम उठाया है। पुलिस ने राज्य में संचालित e-Zero FIR व्यवस्था का दायरा और अधिक विस्तृत कर दिया है। अब पीड़ित की ठगी गई राशि को समय रहते बैंकों में होल्ड (Freeze) कराने और तत्काल कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 25,000 रुपए या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी e-Zero FIR दर्ज की जा रही है।

यह नई व्यवस्था मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लागू की गई है, जिसके तहत 25 दिसंबर 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच प्रदेश भर में कुल 4,888 e-Zero FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पूर्व में यह सुविधा केवल ₹1 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय ठगी के मामलों तक सीमित थी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 25 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश में इस व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया गया था। तकनीक आधारित पुलिसिंग की इस पहल से सूचना मिलते ही डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और पुलिस, बैंक व वित्तीय संस्थानों के बीच त्वरित समन्वय संभव हो पा रहा है।

e-Zero FIR दर्ज करने की इस कार्रवाई में झाबुआ, डिंडोरी, अशोकनगर, मऊगंज, सिवनी, राजगढ़, आगर-मालवा, बालाघाट, देवास, भोपाल ग्रामीण, मंडला, मैहर, बैतूल, अलीराजपुर, नर्मदापुरम, सीधी और खंडवा जिलों ने विशेष रूप से सराहनीय कार्य किया है।

‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व और पुलिस की अपील

साइबर अपराधों में घटना के तुरंत बाद के शुरुआती घंटों को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। यदि पीड़ित इस दौरान तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करता है या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो ठगी गई राशि को अपराधियों द्वारा आहरित (Withdraw) किए जाने से पहले होल्ड कराने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर बिना समय गंवाए तुरंत 1930 पर संपर्क करें।

e-Zero FIR की सीमा को 1 लाख रुपए से घटाकर 25,000 रुपए करने के इस निर्णय से अब छोटे और मध्यम वर्ग के उन अनगिनत पीड़ितों को भी त्वरित कानूनी संरक्षण मिल सकेगा, जो पहले इस व्यवस्था के दायरे से बाहर थे। डिजिटल साक्ष्यों के तत्काल संरक्षण और वित्तीय लेनदेन को समय रहते रोकने की यह प्रभावी प्रणाली आने वाले समय में राज्य में साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने और पीड़ितों की राशि सुरक्षित वापस दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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