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धार में गूंजा उज्जैन के ‘खड़े हनुमान मंदिर’ का मुद्दा

एएचपी और राष्ट्रीय बजरंग दल ने निकाली रैली, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

धार। ​’खड़े हनुमान मंदिर के सम्मान में, भक्त उतरे मैदान में’—भगवा ध्वज और गगनभेदी नारों के बीच धार की सड़कें सोमवार को धार्मिक आक्रोश और आस्था की साक्षी बनीं। उज्जैन सराफा स्थित ऐतिहासिक खड़े हनुमान मंदिर को यथावत रखने और तोड़ी गई संरचनाओं के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर हिंदू संगठनों ने धार में मोर्चा खोल दिया। छोटा आश्रम से आनंद चौपाटी तक रैली निकालने के बाद कार्यकर्ताओं ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

​28 सितंबर सोमवार को धार नगर में अन्तरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद (एएचपी) और राष्ट्रीय बजरंग दल के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने छोटा आश्रम में बैठक के बाद आनंद चौपाटी चौराहा तक रैली निकाली। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने तहसीलदार माला राय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई कि उज्जैन स्थित खड़े हनुमान मंदिर को उसके मूल स्वरूप में यथावत रखा जाए तथा पूर्व में तोड़ी गई दीवार व शिखर का तुरंत पुनर्निर्माण कराया जाए।

इस प्रदर्शन में संत गुणानंद महाराज (छोटा आश्रम), मालवा प्रांत संगठन महामंत्री संजय यादव, राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला अध्यक्ष अशोक मुनिया, एएचपी जिला कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. समीर सिकदार, रोहित प्रजापत, प्रवीण कुमार पांडे, बिजन मजूनदा, संजय गारिया और कुलदीप कमलोदिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पहले प्रभु श्रीराम रहे टेंट में, अब खड़े हनुमान जी

​सभा को संबोधित करते हुए मालवा प्रांत संगठन महामंत्री संजय यादव ने अयोध्या आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि जिस तरह प्रभु श्रीराम कभी टेंट में थे, आज उज्जैन में खड़े हनुमान जी भी उसी स्थिति में पहुंच गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जन्माष्टमी के दिन प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मंदिर की दीवार और शिखर को जेसीबी से नुकसान पहुंचाया गया, हालांकि प्रतिमा अपने स्थान पर अडिग रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन विकास या शासन-प्रशासन का विरोधी नहीं है, लेकिन धार्मिक आस्था के केंद्रों को नुकसान पहुंचाने पर सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराना मजबूरी बन जाता है।

उज्जैन पहुँचकर ले हस्ताक्षर अभियान में भाग

​यह विवाद उज्जैन में वर्ष 2028 के सिंहस्थ महापर्व को लेकर चल रहे विकास कार्यों और चौड़ीकरण से जुड़ा है। वक्ताओं ने 2016 के सिंहस्थ का हवाला देते हुए पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा कि विकास के नाम पर केवल मंदिरों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं होगा। आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए संगठन ने हिंदू समाज से हर मंगलवार और शनिवार को उपवास रखने और उज्जैन पहुंचकर मंदिर में हस्ताक्षर अभियान से जुड़ने की अपील की है। आने वाले समय में यदि मंदिर के पुनर्निर्माण पर ठोस निर्णय नहीं होता, तो यह विरोध मालवा अंचल के अन्य जिलों में भी तेज होने की संभावना है।

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