नगर पालिका पीथमपुर की अमृत 2.0 सीवरेज परियोजना में गंभीर लापरवाही पर मेसर्स आर. एण्ड बी. इंफ्रा प्रोजेक्ट लि. ब्लैक लिस्टेड
भोपाल। जनसुविधाओं और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी बुनियादी परियोजनाओं में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर नगरीय प्रशासन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। काम में अनावश्यक देरी, कार्ययोजना से विचलन और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी के मामले में विभाग ने कड़ा फैसला लेते हुए 5 प्रमुख निर्माण एजेंसियों को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया है।
यह सख्त प्रशासनिक निर्णय 13 अगस्त को नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के सभाकक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। आयुक्त संकेत भोंडवे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों और संविदाकारों का पक्ष सुना गया। जारी कारण बताओ नोटिस, प्रतिवेदनों और अभिमतों की गहन जांच-पड़ताल के बाद इन 5 फर्मों की गंभीर लापरवाही प्रमाणित पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई।
इन 5 निर्माण कंपनियों पर गिरी गाज
अमृत सीवरेज परियोजनाओं में लापरवाही और तय शर्तों के उल्लंघन पर नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 4 प्रमुख शहरों से जुड़ी 5 निर्माण एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया है:
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नगर पालिक निगम, भोपाल (अमृत 2.0 सीवरेज) : पैकेज-2 के लिए मेसर्स जयवरूदी इंफ्राकॉन प्रा. लि. और पैकेज-3 के लिए मेसर्स एल.सी. इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. पर कार्रवाई।
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नगर पालिक निगम, देवास (अमृत 2.0 सीवरेज) : सीवरेज कार्य में लापरवाही पर मेसर्स दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्रा. लि. को किया गया काली सूची में दर्ज।
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नगर पालिक निगम, सतना (अमृत 1.0 सीवरेज) : पैकेज-2 के निर्माण कार्य में शिथिलता बरतने पर मेसर्स इनविराड प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. ब्लैकलिस्ट।
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नगर पालिका परिषद, पीथमपुर (अमृत 2.0 सीवरेज) : परियोजना में गंभीर लापरवाही पर मेसर्स आर. एण्ड बी. इंफ्रा प्रोजेक्ट लि. पर गिरी गाज।
आयुक्त भोंडवे ने स्पष्ट किया कि ब्लैकलिस्ट अवधि के दौरान इन फर्मों का कोई भी नया टेंडर, प्रस्ताव या बोली नगरीय प्रशासन विभाग अथवा उसके अधीनस्थ निकायों द्वारा स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही, निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अनुबंध की शर्तों के तहत आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई पूरी करें और जनहित में बचे हुए सीवरेज कार्यों को बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द पूरा कराएं। विभाग ने संकेत दिया है कि अमृत मिशन की योजनाओं की सतत उच्चस्तरीय निगरानी जारी रहेगी और आगे भी जवाबदेही तय कर इसी तरह के सख्त कदम उठाए जाएंगे।
