राजकुमार हलधर, आशा परमार, निमिषा पांडे और अजमेर सिंह गौड़ बने डिप्टी कलेक्टर
भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने शासकीय सेवा में बड़ा बदलाव करते हुए कई मैदानी और मंत्रालय स्तर के अधिकारियों को पदोन्नति का तोहफा दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी, क्योंकि लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों को अब कनिष्ठ श्रेणी के उच्च वेतनमान के साथ नई कमान सौंप दी गई है।
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 07 जुलाई को वल्लभ भवन, भोपाल से एक महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत राज्य शासन द्वारा 190 अधिकारियों को, जिनमें तहसीलदार, अधीक्षक (भू-अभिलेख) और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर शामिल हैं, अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान (पे मेट्रिक्स लेवल-12) में पदोन्नत किया गया है। इन सभी प्रमोट हुए अधिकारियों को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से उनके नाम के सामने तय किए गए स्थानों पर डिप्टी कलेक्टर व अन्य समकक्ष पदों पर पदस्थ किया गया है।
इस प्रशासनिक बदलाव में धार जिला भी विशेष रूप से शामिल है, जहाँ तीन अधिकारियों को नई पदस्थापना मिली है:
- राजकुमार हलधर (प्रभारी डिप्टी कलेक्टर से डिप्टी कलेक्टर, जिला धार)
- श्रीमती आशा परमार (प्रभारी डिप्टी कलेक्टर से डिप्टी कलेक्टर, जिला धार)
- श्रीमती निमिषा पाण्डे (तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर, जिला धार)
इसके अलावा अजमेर सिह गौड़ को भी जिला धार में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया है।
मुख्य तथ्य और आदेश की शर्तें
सरकारी आदेश के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में निम्नलिखित वैधानिक नियमों का पालन किया गया है:
- परिवीक्षा अवधि : यह सभी पदोन्नतियां मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के अंतर्गत दो वर्ष की परीक्षण अवधि के लिए मान्य होंगी।
- आरक्षण नियमों का पालन : इस आदेश में मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 तथा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के सभी उपबंधों का पूरी तरह पालन किया गया है।
- वेतन निर्धारण का विकल्प : पदोन्नत किए गए सभी शासकीय सेवकों को अपना वेतन तय कराने के लिए आदेश मिलने के एक महीने के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस बड़े फैसले का सीधा असर धार सहित प्रदेश के अन्य जिलों की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की गति पर पड़ेगा। इतने बड़े पैमाने पर तहसीलदारों और प्रभारी अधिकारियों को पूर्ण रूप से डिप्टी कलेक्टर का प्रभार मिलने से स्थानीय प्रशासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और लंबित सरकारी योजनाओं को गति मिलेगी।
आदेश में यह साफ किया गया है कि ये सभी पदोन्नतियां वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित विशेष अनुमति याचिका क्रमांक 13954/2016 तथा भविष्य में कोर्ट द्वारा आने वाले अंतिम फैसलों के अधीन रहेंगी। इसका अर्थ है कि भविष्य में अदालती फैसले के आधार पर इन पदोन्नतियों में बदलाव भी संभव हो सकता है।
प्रशासनिक आदेश की कॉपी देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे :
