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मप्र शिक्षा विभाग का डिजिटल चाबुक : स्कूल के अंदर से ही लगेगी हाजिरी, बाहर रहे तो कटेगा वेतन

अफसर-बाबू भी रडार पर, लापरवाही दिखाई तो सीधे सस्पेंशन

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों और कर्मचारियों की मनमानी नहीं चलेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस (e-Attendance) के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। विभाग के नए फरमान के मुताबिक, अब केवल स्कूल की चौखट लांघने के बाद ही हाजिरी मान्य होगी। शिक्षकों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से स्कूल परिसर के अंदर से ही लॉगइन (Login) और लॉगआउट (Logout) करना होगा।

अगर कोई साहब स्कूल के बाहर से या घर बैठे जुगाड़ से हाजिरी लगाने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं!

ये हैं ई-अटेंडेंस के नए कड़े नियम

  • वेतन कटेगा और नपेंगे गुरुजी : यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी स्कूल परिसर के बाहर से लॉगआउट करता है या अटेंडेंस नहीं लगाता है, तो सीधे वेतन काटने के आदेश हैं। इसके साथ ही कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
  • शिक्षकों के साथ बाबू भी रडार पर : 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ यह नियम सिर्फ स्कूल के शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी दफ्तरों और संकुलों के बाबू और अन्य कर्मचारियों पर भी पूरी तरह लागू हो गया है।
  • अतिथि शिक्षकों के लिए ‘90% का फॉर्मूला’ : अतिथि शिक्षकों के लिए दोबारा ज्वाइनिंग का रास्ता आसान नहीं है। जिन अतिथि शिक्षकों ने फरवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच कम से कम 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस पूरी की है, केवल उन्हें ही दोबारा रखा जा रहा है। हालांकि, विशेष मामलों में विभागीय जांच के बाद थोड़ी राहत मिल सकती है।
  • गाज प्राचार्यों पर भी गिरेगी: लापरवाही बरतने वाले संकुल प्राचार्यों (Cluster Principals) को भी बख्शा नहीं जाएगा। अगर उनके अधीन 100% ई-अटेंडेंस सुनिश्चित नहीं हुई, तो प्राचार्यों पर सीधे सस्पेंशन की कार्रवाई की जा सकती है।

‘नेटवर्क नहीं है’ का बहाना नहीं चलेगा

विभाग के इस कड़े रुख के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि कई ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की भारी तकनीकी समस्या रहती है, जिससे ऐप काम नहीं करता। शिक्षकों ने मांग की है कि नियमों को व्यावहारिक और संवेदनशील तरीके से लागू किया जाए।

सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर यह है कि सरकार और विभाग बैकफुट पर आने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि सिस्टम में पारदर्शिता और समय की पाबंदी लाने के लिए यह डिजिटल प्रणाली इसी सख्ती के साथ जारी रहेगी। अब देखना होगा कि इस ‘डिजिटल चाबुक’ के बाद मप्र की शिक्षा व्यवस्था पटरी पर कितनी जल्दी लौटती है।

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