करीब 900 करोड़ के प्रस्तावित बजट से 16 से 18 छोटे सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेंगे
अब चंबल के बीहड़ों से लेकर नक्सलियों के मांद तक मप्र पुलिस की नो-नेटवर्क टेंशन खत्म
भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश पुलिस अब केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से भी अपराधियों पर तीसरी आंख के जरिए पैनी नजर रखने की तैयारी में है। राज्य में अपराधियों की नकेल कसने और पुलिसिंग को हाईटेक बनाने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस एक बेहद महत्वाकांक्षी ‘मिशन स्पेस’ योजना पर काम कर रही है।
अगर इस प्रस्ताव को नीति आयोग और राज्य सरकार से अंतिम हरी झंडी मिल जाती है, तो मध्यप्रदेश पुलिस देश की पहली ऐसी पुलिस फोर्स बन जाएगी, जिसके पास अंतरिक्ष में अपना खुद का सैटेलाइट नेटवर्क (सैटेलाइट कॉन्स्टिलेशन) होगा।
आइए जानते हैं, पुलिस का यह ‘मिशन स्पेस’ और प्रदेश सरकार की नई ‘स्पेसटेक पॉलिसी-2026’ कैसे बदलने जा रही है सूबे की सुरक्षा का पूरा ढांचा :
900 करोड़ का बजट और दुनिया की पहली ‘DiskSat’ तकनीक
इस पूरे प्रोजेक्ट का खाका इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग सेंटर (PRTC) में इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों की मदद से तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 900 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है, जिसके तहत 16 से 18 छोटे सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे।
ये सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित किए जाएंगे। जमीन के करीब होने के कारण इनसे डेटा ट्रांसफर पलक झपकते ही (लो-लेटेंसी) होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, यह दुनिया का पहला चालू ‘स्टैक्ड डिस्कसेट कॉन्स्टिलेशन’ हो सकता है। इसमें डिस्क के आकार के सैटेलाइट्स को एक के ऊपर एक रखकर एक ही रॉकेट से लॉन्च किया जाता है, जिससे लॉन्चिंग का भारी-भरकम खर्च बेहद कम हो जाता है। यह नेटवर्क जियो या एयरटेल जैसी निजी कंपनियों पर निर्भर नहीं होगा। पूरी तरह एन्क्रिप्टेड होने के कारण इसे हैक या लीक करना नामुमकिन होगा।
कैसे बदलेगी अपराधियों की दुनिया
अंतरिक्ष से प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। असामाजिक तत्वों और अपराधियों की हर हरकत पुलिस की स्क्रीन पर होगी।
चंबल के बीहड़ हों या नक्सल प्रभावित बालाघाट के घने जंगल, जहां मोबाइल नेटवर्क दम तोड़ देता है, वहां पुलिसकर्मी बिना किसी रुकावट के सैटेलाइट फोन और जीपीएस के जरिए मुख्यालय से जुड़े रहेंगे।
किसी भी दंगे, बड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति या वीआईपी मूवमेंट के दौरान सीधे भोपाल मुख्यालय को लाइव सैटेलाइट फीड मिलेगी। साथ ही बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव कार्य में यह संजीवनी साबित होगा।
मप्र बनेगा देश का नया अंतरिक्ष हब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा साल 2026 की शुरुआत में मंजूर की गई ‘स्पेसटेक पॉलिसी-2026’ इस मिशन को और मजबूती देगी। सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख स्पेस-टेक्नोलॉजी हब बनाना है।
नीति के मुख्य आकर्षण:
- 360-डिग्री विज़न: इस नीति में रॉकेट-सैटेलाइट निर्माण (Upstream), ग्राउंड स्टेशन संचालन (Midstream) और AI व डेटा एनालिटिक्स के जरिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल (Downstream) शामिल है।
- रोजगार और निवेश: अगले कुछ सालों में 900 से 1000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करने, 30 नए स्पेस स्टार्टअप शुरू करने और 2,000 से अधिक कुशल नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है।
- उज्जैन में बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’: धार्मिक नगरी उज्जैन में एक विशेष स्पेसटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और खगोल भौतिकी (Astrophysics) के लिए समर्पित रिसर्च सेंटर बनाया जा रहा है।
- स्टार्टअप्स को बंपर सब्सिडी: सरकार ने निजी स्पेस कंपनियों के लिए 200 करोड़ रुपए का रणनीतिक फंड तय किया है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर 40% तक की कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी।
नज़रिया : मध्यप्रदेश पुलिस का यह कदम आने वाले दिनों में देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट सैद्धांतिक स्तर पर है, लेकिन अगर यह जमीन पर उतरा, तो मप्र पुलिसिंग के मामले में सीधे भविष्य की तकनीक से जुड़ जाएगी।
