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नकली पनीर पर नकेल : मप्र में एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से लगा बैन

भोपाल। असली पनीर के नाम पर बाजार में बिक रहे मिलावटी और गैर-दुग्ध (एनालॉग) उत्पादों को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में असली पनीर का झांसा देकर बेचे जाने वाले एनालॉग पनीर और अन्य नकल उत्पादों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है

खाद्य सुरक्षा एवं नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश के आयुक्त सुखवीर सिंह द्वारा यह आदेश 12 अगस्त 2026 को भोपाल से जारी किया गया। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18 और 30 के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में किए गए निरीक्षणों और लैब रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि राज्य में एनालॉग पनीर का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। वर्ष 2025-26 के दौरान जांचे गए 921 रेग्यूलेट्री नमूनों में से 123 नमूने अमानक पाए गए, जिनमें वसा (Fat) का प्रतिशत और BR रीडिंग पनीर के तय मानकों के अनुरूप नहीं थी

डेयरी एनालॉग क्या है ? भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार, यह एक ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध के अवयवों को आंशिक या पूरी तरह से गैर-दुग्ध (जैसे वनस्पति वसा या तेल) घटकों से बदल दिया जाता है। यह देखने और स्वाद में असली पनीर जैसा ही लगता है

होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता अक्सर ग्राहकों को बिना बताए व्यंजनों में असली पनीर की जगह एनालॉग पनीर का उपयोग कर रहे थे। चूंकि ये खुले रूप में परोसे जाते हैं, इसलिए आम उपभोक्ताओं के पास असली और नकली में अंतर पहचानने का कोई जरिया नहीं था। लगातार इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव, विशेषकर वनस्पति वसा, इमल्सीफायर और स्टार्च के कारण पाचन संबंधी समस्याएं और पोषण में कमी का खतरा बना रहता है

बैन के दायरे में क्या शामिल है ?

  • प्रतिबंधित : असली दुग्ध उत्पादों (जैसे पनीर, क्रीम, मक्खन, मावा) की नकल करने वाले सभी गैर-दुग्ध/एनालॉग उत्पाद

  • छूट : फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे पहले से मानकीकृत उत्पाद इस आदेश से बाहर रहेंगे

यह प्रतिबंध आदेश जारी होने की तिथि से लागू हो गया है और FSSAI द्वारा अंतिम मानक अधिसूचित होने तक अथवा अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। सरकार के इस कदम से आम जनता को पोषण से जुड़ी धोखाधड़ी से राहत मिलेगी और खाद्य कारोबार में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। राज्यभर के खाद्य अधिकारियों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं

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