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लॉ की पढ़ाई के लिए स्वेच्छा से छोड़ेंगे 10 महीने की सैलरी और भत्ते सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को लिखा पत्र

भोपाल। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट (221) से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एक अनोखी और मिसाल पेश करने वाली मिसाल पेश की है। विधायक डोडियार ने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन और भत्तों को स्वेच्छा से न लेने का बड़ा फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को एक आधिकारिक पत्र लिखकर आग्रह किया है।

क्यों लिया यह फैसला?

कमलेश्वर डोडियार भोपाल स्थित प्रतिष्ठित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) से एक वर्षीय एलएलएम (LLM – मास्टर ऑफ लॉ) पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में नियमित छात्र के रूप में अध्ययन करने जा रहे हैं। उनका यह शैक्षणिक सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 15 मई 2027 तक चलेगा। विधायक का मानना है कि इस दौरान वे नियमित कक्षाओं और परीक्षाओं में व्यस्त रहेंगे, इसलिए वे स्वेच्छा से इस अवधि (करीब 10 महीने) का विधायक वेतन और भत्ता स्वीकार नहीं करना चाहते।

पत्र में वेतन रोकने का आग्रह

पत्र (क्रमांक 467/VIP/2026, दिनांक 13/07/2026) के माध्यम से उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उनके इस स्वैच्छिक निर्णय को स्वीकार करते हुए 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 तक उन्हें देय वेतन और भत्तों का भुगतान स्थगित किया जाए।

बिना किसी दबाव के निर्णय

डोडियार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के पूरी तरह अपनी स्वेच्छा से लिया है। भविष्य में यदि दोबारा वेतन-भत्ते प्राप्त करने की आवश्यकता होगी, तो वे इसके लिए अलग से आवेदन करेंगे।

क्षेत्र की जनता और कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता

विधायक ने जनता को आश्वस्त किया है कि पढ़ाई के साथ-साथ वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों में संतुलन बनाए रखेंगे। वे प्राथमिकता के आधार पर विधानसभा सत्रों में उपस्थित होंगे, सैलाना क्षेत्र में शासकीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे और अपने स्वयं के खर्च से क्षेत्र का दौरा कर जनसुनवाई व जनसमस्याओं का निवारण करते रहेंगे।

राजनीतिक गलियारों में विधायक कमलेश्वर डोडियार के इस कदम की काफी सराहना हो रही है, जहां आमतौर पर जनप्रतिनिधियों पर भत्तों और सुविधाओं को बढ़ाने के आरोप लगते हैं, वहीं एक विधायक द्वारा पढ़ाई के दौरान जनता के पैसे (वेतन-भत्ते) को स्वेच्छा से त्यागना एक बेहद सकारात्मक संदेश दे रहा है।

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